ज्ञानेश कुमार ने कहा ' गेट लॉस्ट! डेरेक का दावा
'वे अंदर चिल्ला रहे थे', आयोग ने जवाब दिया
निज संवाददाता : पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की सियासत गरमा गई है। इसकी बड़ी वजह राज्य में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) है। तृणमूल कांग्रेस ने एसआईआर के दौरान वोटर लिस्ट से लोगों के नाम कटने पर नाराजगी जाहिर की है। इसी मुद्दे को लेकर टीएमसी के एक प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को चुनाव आयोग से मुलाकात की। इस प्रतिनिधिमंडल में टीएमसी सांसद डेरेक ओ’ब्रायन, सांसद सागरिका घोष के अलावा साकेत गोखले और मेनका गुरुस्वामी शामिल थे। मुलाकात के बाद टीएमसी नेताओं ने चुनाव आयोग पर जमकर निशाना साधते हुए गंभीर आरोप लगाए।
डेरेक ओ’ब्रायन ने दावा किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने सांसदों से गेट लॉस्ट कहा। उन्होंने ये भी कहा कि ये मुलाकात महज सात मिनट की थी। सांसद ने कहा कि हमने चुनाव आयोग को 9 चिट्ठी लिखी, 6 उदाहरण दिए, सभी चुनाव प्रक्रिया का हिस्सा थे, लेकिन चुनाव आयोग की ओर से किसी का कोई रिस्पॉन्स नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि हम लोग यही बताने के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त के पास गए थे।
सांसद डेरेक ने आगे कहा कि आज जो कुछ भी चुनाव आयोग से मुलाकात के दौरान हुआ वह शर्म की बात है। उन्होंने कहा कि इतने सालों से नो सांसद में हैं, राजनीति में हैं, लेकिन ऐसा कभी नहीं हुआ। उन्होंने चुनाव आयोग से मांग की कि आज मीटिंग में जो हुआ उसका ऑडियो या वीडियो रिलीज किया जाए।
उन्होंने आगे कहा कि यह पहले मुख्य चुनाव आयुक्त हैं, जिनको हटाने के लिए लोकसभा और राज्यसभा में नोटिस दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि मुख्य चुनाव में आयुक्त को हटाने के नोटिस को लेकर आज शाम सभी लाइक माइंडेड पार्टियों की शाम 5:00 बजे कांस्टीट्यूशन क्लब में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस होगी।
इधर सूत्रों के अनुसार टीएमसी सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने चुनाव आयोग से मुलाकात के दौरान शोरगुल मचाया था। सूत्रों का कहना है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने सांसद से आयोग कक्ष में मर्यादा बनाए रखने का अनुरोध किया था और कहा था कि चिल्लाना और अभद्र व्यवहार करना उचित नहीं है।
वहीं टीएमसी नेता साकेत गोखले ने इसे बेबुनियाद और झूठा आरोप बताया। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर किया है, जिसमें उन्होंने कहा-यह झूठ है। मैं स्वयं बैठक में उपस्थित था। ऐसी कोई बात नहीं हुई। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने हमसे केवल इतना कहा, गेट लॉस्ट। हम चुनाव आयोग को बैठक का लिखित विवरण जारी करने की चुनौती देते हैं। अन्यथा हम स्वयं ऐसा करेंगे।
वहीं चुनाव आयोग ने तृणमूल कांग्रेस से दो टूक कहा है कि पश्चिम बंगाल में इस बार चुनाव भय मुक्त, हिंसा मुक्त, धमकी मुक्त, प्रलोभन मुक्त और और बिना किसी छापा मुक्त, बूथ जाम या स्रोत जाम के होकर ही रहेंगे।
बता दें कि तृणमूल कांग्रेस के ज्ञापन में कहा गया है कि पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रक्रिया के दौरान कुछ अधिकारी निष्पक्ष नहीं हैं। इससे चुनाव की पारदर्शिता और भरोसे पर असर पड़ रहा है। पार्टी ने कुछ अधिकारियों पर राजनीतिक पक्षपात का आरोप लगाया गया है कि वे किसी विशेष पार्टी के पक्ष में काम कर रहे हैं। वहीं चुनाव के समय अधिकारियों की नियुक्ति/ट्रांसफर को लेकर सवाल उठाए गए हैं। पार्टी ने कहा है कि ऐसे कदमों से चुनाव का माहौल प्रभावित हो सकता है। मतदाताओं का भरोसा कम हो सकता है। टीएमसी ने चुनाव आयोग से मांग की है कि संदिग्ध अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हो, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित हो।
