एसआईआर के तहत सुनवाई की प्रक्रिया शुरू

तृणमूल सांसद के दो बेटे समेत परिवार के चार सदस्यों को चुनाव आयोग का नोटिस

एसआईआर के तहत सुनवाई की प्रक्रिया शुरू


निज संवाददाता : बंगाल में ड्राफ्ट वोटर लिस्ट के प्रकाशन के बाद शनिवार से सुनवाई की प्रक्रिया शुरू हो गई है। बारासात से तृणमूल की सांसद काकोली घोष दस्तीदार के दोनों बेटों को एसआईआर  प्रोसेस में सुनवाई के लिए बुलाया गया है। यहां तक कि तृणमूल कांग्रेस की सांसद की मां और बहन को भी सुनवाई में पेश होने के लिए नोटिस भेजा गया है। काकोली घोष दस्तीदार ने इसे लेकर सवाल उठाया। 
तृणमूल कांग्रेस का शुरू से ही आरोप है कि  एसआईआर  प्रोसेस जल्दबाजी में किया जा रहा है। ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी ने सवाल उठाया है कि दो साल का काम दो महीने में क्यों किया जा रहा है। एसआईआर  की ड्राफ्ट लिस्ट जारी होने के बाद से कई तरह की गड़बड़ियां सामने आई हैं।
डानकुनी म्युनिसिपैलिटी के तृणमूल काउंसलर सूर्या डे के नाम के आगे ‘मृत’ लिखा है। इसके साथ ही माकपा राज्य सचिव मोहम्मद सलीम के बेटे के सरनेम और मंत्री शोभनदेव चट्टोपाध्याय के सरनेम में गड़बड़ी को लेकर भी सवाल उठे हैं।
इसके साथ ही खंड घोष विधासनभा केंद्र से तृणमूल कांग्रेस के विधायक नवीनचंद्र बाग की मां, भाई और बहनोई को सुनवाई के लिए बुलाया गया है। इस बार सुनवाई के लिए काकोली घोष दस्तीदार के दो बेटों, मां और बहन को बुलाया गया है।
काकोली 2009  से लोकसभा की सांसद हैं। काकोली घोष दस्तीदार ने सवाल किया है कि अगर किसी सांसद के परिवार वालों को बुलाया जाता है, तो आम लोगों की क्या हालत होती होगी?
काकोली घोष दस्तीदार ने बताया-जब मैंने ड्राफ्ट लिस्ट देखी, तो मैंने देखा कि मेरे दो बेटों के नाम गायब थे। उन्हें सुनवाई के लिए बुलाया गया हैं। उनके पिता (पूर्व राज्य मंत्री सुदर्शन घोष दस्तीदार) पूर्व मंत्री हैं। मैं चार बार की सांसद हूं। मेरे दो बेटे सरकारी कर्मचारी है। वे सुनवाई में जाएंगे।
उन्होंने कहा कि इससे पता चलता है कि एसआईआर  कैसे किया जा रहा है। दूर-दराज के इलाकों के लोग, जिनसे ज्यादा बातचीत नहीं होती, उन्हें नहीं पता कि वे सुनवाई में क्या मांग रहे हैं, उन्हें परेशान किया जा रहा है। उनके नाम जबरदस्ती काटकर उन्हें खतरे में डालने की कोशिश की जा रही है। मेरी मां और बहन दूसरे बूथ की वोटर हैं। उनके नाम भी गायब हैं। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने अभी तक इस बारे में कुछ नहीं कहा है कि एक सांसद के परिवार वालों के नाम ड्राफ्ट लिस्ट से कैसे बाहर कर दिए गए।

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