पुलिस के हत्थे चढ़ा माओवादी नेता असीम मंडल उर्फ आकाश

डेढ़ दशक से थी तालाश

पुलिस के हत्थे चढ़ा माओवादी नेता असीम मंडल उर्फ आकाश

निज संवाददाता : राज्य पुलिस को एक बड़ी कामयाबी मिली है। सीपीआई (माओवादी) के एक बड़े नेता असीम मंडल—जिन्हें आकाश या मनोज के नाम से भी जाना जाता है और जो लंबे समय से सुरक्षा बलों की नज़र में थे—को गिरफ़्तार कर लिया गया है। कोलकाता पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ)  ने उन्हें पूर्वी मेदिनीपुर के पटाशपुर इलाके से पकड़ा। शुरुआती जानकारी से पता चलता है कि वह इलाज के लिए पैसे जुटाने के मकसद से उस इलाके में आए थे। उनकी गिरफ़्तारी की खबर गुरुवार, 17 सितंबर को सामने आई।
आकाश को लंबे समय से पश्चिम बंगाल में माओवादी संगठन का एक अहम सदस्य माना जाता रहा है। उन्हें पकड़ने के लिए कुछ दिन पहले ही बंगाल-झारखंड सीमा के पास के जंगलों में बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाया गया था। 14 सितंबर को छपी एक रिपोर्ट में बताया गया था कि दो दिन तक चले सघन तलाशी अभियान के बावजूद आकाश का पता नहीं चल सका था। उस समय रोलाहातू पहाड़ियों से दो इंसास  राइफलें, 103 राउंड कारतूस और छह मैगज़ीन बरामद की गई थीं। अधिकारी इस बात की जांच कर रहे थे कि क्या ये हथियार किसी पुरानी तोड़-फोड़ की घटना से जुड़े थे।
इसके कुछ समय बाद हालात बदल गए। कई रिपोर्टों में दावा किया गया कि आकाश, जो लंबे समय से जंगलों में छिपे हुए थे, हाल ही में अपने मिलिट्री स्क्वाड से अलग हो गए थे। 14 सितंबर की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि उन्होंने खराब सेहत और सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव के कारण यह फैसला लिया। अलग-अलग सूत्रों ने यह भी बताया कि उन्हें पकड़ने के लिए एक करोड़ रुपये के इनाम की घोषणा की गई थी।
आकाश के इस फैसले के पीछे उनके संगठन की कमजोर होती हालत को भी एक अहम वजह माना गया। उनके कई करीबी साथियों ने सरेंडर कर दिया था और कई सदस्य गिरफ़्तार हो चुके थे। पुलिस इन लोगों से पूछताछ करके आकाश की गतिविधियों, बातचीत के नेटवर्क और संगठन के पिछले कामों के बारे में जानकारी जुटाने की कोशिश कर रही थी। नतीजतन, जांच से जुड़े सूत्रों का दावा है कि समय के साथ उनकी सुरक्षा का घेरा काफी कमजोर हो गया था।
माओवादी आंदोलन में आकाश का लंबा इतिहास रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, वह 1980 के दशक में कॉलेज के दिनों में ही वामपंथी उग्रवादी आंदोलन से जुड़ गए थे। बाद में उन्होंने सीपीआई  (माओवादी) संगठन में अहम जिम्मेदारियां संभालीं। कई रिपोर्टों में दावा किया गया है कि किशनजी की मौत के बाद वह पश्चिम बंगाल में माओवादी संगठन के नेता बने। उन्होंने लंबे समय तक जंगलों में रहकर संगठन के कामकाज को संभाला था। इसीलिए, पटाशपुर में उसकी गिरफ्तारी को जांच करने वाले एक बड़ी कामयाबी मान रहे हैं। इतने लंबे समय तक जंगलों और सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा बलों से बचते हुए काम करने के बाद, अब उसे पुलिस ने एक शहरी इलाके के पास पकड़ लिया है। गिरफ्तारी के बाद उससे मिली जानकारी अब जांच का एक अहम हिस्सा है।
खासकर, उससे माओवादी संगठन के बचे हुए संपर्कों, फंडिंग के स्रोतों, पुराने साथियों और सीमावर्ती इलाकों में संभावित कम्युनिकेशन नेटवर्क के बारे में पूछताछ किए जाने की संभावना है। इसके अलावा, जांच करने वाले उन सदस्यों के साथ उसके संबंधों की भी जांच कर सकते हैं जिन्होंने हाल के महीनों में जंगल छोड़ दिए हैं या सरेंडर कर दिया है।
माओवादी आंदोलन में लगभग चार दशकों तक शामिल रहने के बाद आकाश की गिरफ्तारी, पश्चिम बंगाल में सशस्त्र संघर्ष के इस अध्याय में एक अहम मोड़ है। हालांकि, जांच अभी भी एक अहम चरण में है क्योंकि अधिकारी संगठन के बचे हुए सक्रिय नेटवर्क के दायरे का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं।

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