नेपाल में पांच दिनों से जारी भारी बारिश के कारण 27 लोगों की मौत
बिहार के ज़िलों में बाढ़ का ख़तरा
निज संवाददाता : नेपाल में बीते 24 सितंबर से सोमवार शाम तक लगातार बारिश के कारण आई बाढ़, भूस्खलन, जलभराव, तेज़ हवाओं और बिजली गिरने जैसी प्राकृतिक आपदाओं में कम से कम 27 लोगों की मौत हो गई और सात लोग घायल हो गए। यह जानकारी नेपाल के प्रधानमंत्री कार्यालय ने दी।
नेपाल के गृह मंत्रालय के मुताबिक, 24 से 28 सितंबर के बीच मानसून से जुड़ी घटनाओं में चार लोग लापता हैं, जबकि आठ लोग घायल हुए हैं। आपदा की इन घटनाओं से 1,082 परिवार प्रभावित हुए और 114 मवेशी मारे गए। अधिकारियों के अनुसार, इस दौरान भूस्खलन की 304 घटनाएं हुईं, जिनमें 20 लोगों की मौत हुई, जबकि चार लोग लापता हो गए और सात घायल हो गए।
इसी तरह, नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (एनडीआरआरएमए) के अनुसार, बाढ़ से जुड़ी 87 घटनाओं में चार लोगों की मौत हुई, जबकि भारी बारिश से जुड़ी 151 घटनाओं में तीन लोगों की जान गई और एक व्यक्ति घायल हुआ।
भारी बारिश ने 227 घरों को नष्ट कर दिया और 142 अन्य घरों को आंशिक रूप से नुकसान पहुंचाया। बाढ़ और भूस्खलन से 31 पुलों को भी नुकसान पहुँचा। एनडीआरआरएमए ने बताया कि बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के सिस्टम के कारण इस दौरान देश के विभिन्न हिस्सों में भारी बारिश हुई।
रविवार को नेपाल के मनांग जिले में ज़बरदस्त भूस्खलन हुआ, जिससे मलबा मार्स्यांगडी नदी में गिर गया और नदी का कुछ हिस्सा कुछ समय के लिए अवरुद्ध हो गया। हिमालयी देश में लगातार बारिश के कारण हुए इस भूस्खलन के बाद अधिकारियों ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों से सतर्क रहने और सावधानी बरतने को कहा। नदी का कुछ हिस्सा कुछ घंटों तक अवरुद्ध रहा और फिर बिना किसी बड़े नुकसान के स्थिति सामान्य हो गई।
देश अभी भी पिछले महीने नेपाल-तिब्बत सीमा के पास आई विनाशकारी अचानक बाढ़ के असर से उबर रहा है। हिमालयी सीमावर्ती क्षेत्र से दक्षिण की ओर बहने वाली भोटेकोशी नदी बाढ़ का पानी निचले इलाकों में ले गई, जिससे घर, वाहन, सड़कें और पुल बह गए और जलविद्युत परियोजनाओं को नुकसान पहुंचा। 26 अगस्त को अचानक आई बाढ़ में कम से कम 1,453 लोगों की मौत हो गई और 5,000 से ज़्यादा लोग लापता हो गए। नेपाल में भारी मॉनसून बारिश के कारण अक्सर भूस्खलन हो रहे हैं।
रविवार को उत्तरी और पश्चिमी नेपाल के पाल्पा, मनांग और मुस्तांग ज़िलों में भूस्खलन से कुछ नदियां भी रुक गईं, हालांकि इसका असर ज़्यादा नहीं हुआ क्योंकि कुछ घंटों बाद रुकी हुई नदियाँ फिर से बहने लगीं।
रविवार को नेपाल के मनांग ज़िले के नार फू इलाके में 7,126 मीटर ऊंची हिमलुंग हिमाल चोटी के बेस कैंप पर हिमस्खलन हुआ। इसमें वे टेंट दब गए जहां सपोर्ट स्टाफ़ और माउंटेन गाइड शरण लिए हुए थे, जिससे 22 लोग लापता हो गए– ये सभी नेपाली थे।
नेपाल में भारी बारिश के कारण मंगलवार को गंडक नदी का जलस्तर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जिससे पश्चिमी चंपारण ज़िले में तटबंधों को नुकसान पहुंचा और पहले से ही भीषण बाढ़ से जूझ रहे बिहार में बड़े पैमाने पर बाढ़ का खतरा पैदा हो गया।
जल संसाधन विभाग ने बताया कि नेपाल में भारी बारिश के बाद बगहा में गंडक नदी का जलस्तर रिकॉर्ड 91.25 मीटर तक पहुँच गया। यह 2024 में दर्ज किए गए स्तर से 0.35 मीटर ज़्यादा था।
विभाग ने बताया कि नेपाल में तेज़ बारिश के बाद वाल्मीकिनगर बैराज से बहुत ज़्यादा पानी छोड़े जाने के कारण रात भर में गंडक के बाएं किनारे पर बगहा-1 में खैरातवा और बैरिया में फुलियाखड के पास चंपारण तटबंध के दो हिस्से क्षतिग्रस्त हो गए।
विभाग ने कहा कि अब तक 169 सीपेज पॉइंट्स (पानी के रिसाव वाली जगहों) की मरम्मत की जा चुकी है। तटबंधों पर भारी दबाव को देखते हुए बगहा, बेतिया, मोतिहारी और गोपालगंज में चार टीमें भेजी गई हैं।
सोमवार सुबह 6 बजे वाल्मीकिनगर बैराज पर 5,43,500 क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज दर्ज किया गया। पानी का बहाव 13 घंटे तक 5 लाख क्यूसेक से ज़्यादा और 32 घंटे तक 4 लाख क्यूसेक से ज़्यादा रहा।
विभाग ने बताया कि वाल्मीकिनगर में गंडक बैराज पर सुबह 10 बजे पानी का बहाव 1,86,200 क्यूसेक था, जो सोमवार सुबह 8 बजे के 1,91,200 क्यूसेक से कम था। वहीं, बीरपुर में कोसी बैराज पर सुबह 10 बजे यह 1,20,055 क्यूसेक और इंद्रपुरी में सोन बैराज पर 1,51,116 क्यूसेक था।
