छह महीने बाद सोनाली खातून बांग्लादेश से लौटी
अप्रवासी बताकर भेजी गई थी पड़ोसी देश
निज संवाददाता : बीरभूम की सोनाली खातून बांग्लादेश से भारत लौट आई है। दिल्ली पुलिस द्वारा अवैध अप्रवासी बताकर बांग्लादेश भेजी गई सोनाली अब छह महीने बाद वापस भारत लौटीं है। वह पश्चिम बांगल के बीरभूम की रहने वाली थी। दिल्ली पुलिस द्वारा अवैध अप्रवासी बताने के बाद बीएसएफ ने उन्हें बांग्लादेश भेज दिया था। नौ महीने की प्रेग्नेंट सोनाली अपने आठ साल के बेटे के साथ शुक्रवार शाम को भारत लौटीं।
सोनाली और उनका बेटा, मालदा के सीमा चौकी से रात करीब 7 बजे बंगाल में प्रवेश किए। उनका स्वागत जिला परिषद की सभापति लिपिका घोष और तृणमूल के अन्य नेताओं ने किया। इसके बाद अधिकारियों ने उन्हें मालदा मेडिकल कॉलेज पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने यह सुनिश्चित किया कि वे सड़क मार्ग से अपने घर बीरभूम पहुंच सकती है।
जमानत मिलने के बाद सोनाली और उनके परिवार को शरण देने वाले बांग्लादेशी दंपति फारूक और मुमताज हुसैन ने बताया कि चपाई नवाबगंज के डॉक्टरों ने सोनाली की कुछ दिनों में डिलीवरी कराने की योजना बनाई थी। लेकिन जब बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश ने कहा कि उन्हें तुरंत बीएसएफ को सौंपना होगा तो उन्होंने यह योजना छोड़ दी। सोनाली के पति दानिश अभी भी बांग्लादेश में है। इसके अलावा दानिश के साथ बीरभूम की ही निवासी स्वीटी बीवी और उनके दो बेटे भी प्रत्यर्पण की औपचारिकताएं पूरी होने का इंतजार कर रहे हैं।
इन सभी के वकीलों ने बताया कि आधार और अन्य पहचान पत्र होने के बावजूद, इन सभी छह लोगों को 26 जून को डिपोर्ट कर दिया गया था। दिल्ली में कबाड़ बीनकर गुजारा करने वाली सुनाली, दानिश और स्वीटी को 17 जून को अवैध रूप से भारत में रहने वाली बांग्लादेशी होने के संदेह में पकड़ा गया था। सुप्रीम कोर्ट के तीन दिसंबर के आदेश के बावजूद सुनाली की वापसी में देरी हो रही थी। कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया था कि तीन दिसंबर को ही उनको वापस भारत लाया जाए। सोनाली खातून के वकील ने शुक्रवार की सुबह कोर्ट की रजिस्ट्री को तत्काल सुनवाई के लिए एक ईमेल भेजा था।
दोपहर करीब 3.30 बजे बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश और भारतीय दूतावास के अधिकारियों के चपाई नवाबगंज पहुंचने के बाद चीजें आगे बढ़ने लगीं। उन्होंने सोनाली और उनके बच्चे को घर से अंतरराष्ट्रीय सीमा तक ले जाने की व्यवस्था की। रामपुरहाट के मुख्य चिकित्सा अधिकारी सोवन दे ने बताया कि बीरभूम में सोनाली के आगमन के लिए सभी संभव मेडिकल व्यवस्थाएं की गई थीं। बांग्लादेश में उनकी वापसी की सुविधा के लिए मौजूद सामाजिक कार्यकर्ता मोफिजुल ने कहा कि डॉक्टरों द्वारा यात्रा के लिए फिट घोषित किए जाने के बाद एक एम्बुलेंस उन्हें मालदा से उनके घर ले जाएगी।
सोनाली की मां ज्योत्सना और उनकी बेटी अनीशा भी शुक्रवार को दिल्ली से अपने बीरभूम स्थित घर लौट आईं। दोनों 3 दिसंबर को हुई सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के लिए दिल्ली गई थीं। ज्योत्सना ने कहा कि जैसे ही हमें बताया गया कि सोनाली वापस आ रही है, हमने दिल्ली से ट्रेन पकड़ ली। उन्होंने कहा कि मुझे उसकी सेहत की चिंता है। उन्होंने आगे कहा कि दोपहर में जब वह सोनाली से बात की तो वह अस्वस्थ महसूस कर रही थी और रो रही थी।
