शुरू हुआ बंगाल विधानसभा का विशेष सत्र

बांग्ला भाषा और बंगालियों पर 'हमले' पर लाया गया प्रस्ताव

शुरू हुआ बंगाल विधानसभा का विशेष सत्र

दूसरे राज्यों में बांग्ला भाषा और बंगालियों पर अत्याचार के आरोप लगातार लग रहे हैं। राज्य सरकार इसे लेकर चिंतित है।

निज संवाददाता : दूसरे राज्यों में बांग्ला भाषा और बंगालियों पर अत्याचार के आरोप लगातार लग रहे हैं। राज्य सरकार इसे लेकर चिंतित है। हालांकि नवान्न ने बंगाल के प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा के लिए पहले ही कई कदम उठाए हैं। इसके बावजूद, लगभग हर दिन किसी न किसी राज्य से बंगाली श्रमिकों पर अत्याचार की खबरें आ रही हैं। इस बार इसकी निंदा करते हुए एक प्रस्ताव विधानसभा में लाया गया है। आज, सोमवार से विधानसभा में एक विशेष सत्र आयोजित किया गया । यह 4 सितंबर तक चलेगा। इस बीच, बुधवार, 3 तारीख को करम पूजा की छुट्टी है। मालूम  हो कि शेष दो दिनों तक इस पर चर्चा की जाएगी।
सोमवार को सुबह 11 बजे विधानसभा में सत्र शुरू हुआ। उच्च न्यायालय के आदेश के बाद, अध्यक्ष के निर्देश पर विधानसभा के द्वार पर एक अधिसूचना जारी की गई कि कोई भी विधायक या मंत्री का सुरक्षा गार्ड किसी भी हथियार के साथ विधानसभा में प्रवेश नहीं कर सकेगा। आज शोक प्रस्ताव के बाद, संविधान के अनुच्छेद 169 के तहत बंगाली विरोधी मुद्दे की निंदा करते हुए एक प्रस्ताव लाया गया। बताया जा रहा है कि इस पर मंगलवार और गुरुवार को दो घंटे चर्चा होगी। विधानसभा में मुख्य रूप से इसी प्रस्ताव के आधार पर तीन दिवसीय विशेष सत्र बुलाया गया है। एक-दो अन्य मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना है। विशेष सत्र में एसआईआर का विरोध और महिला सुरक्षा पर निर्विरोध पारित विधेयक को वापस लेने जैसे मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। इसके अलावा, हाल ही में रद्द किए गए 2016 एसएससी पैनल के 'दागी' सदस्यों की सूची प्रकाशित हुई है। इसमें सत्तारूढ़ खेमे के कई लोगों के नाम शामिल हैं। विधानसभा की मुख्य जांचकर्ता और पानीहाटी से तृणमूल विधायक निर्मल घोष की बहू का भी नाम इस सूची में है। हालांकि निर्मल घोष ने कहा कि मामला उठने पर अदालत में सच्चाई साबित हो जाएगी। इसके बावजूद, आशंका है कि विपक्ष इस सूची को जारी कर विधानसभा में हंगामा कर सकता है। कुल मिलाकर, जानकार हलकों की नजर मंगलवार और गुरुवार को विधानसभा के इस विशेष सत्र पर रहेगी।

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