पीएम गति शक्ति ने कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी, तेज और प्रभावीशाली बनाया

पीएम गति शक्ति ने कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी, तेज और प्रभावीशाली बनाया

भास्कराचार्य संस्थान के महानिदेशक टी.पी. सिंह ने प्रधानमंत्री गति शक्ति परियोजना के उद्देश्यों

भोपाल। भास्कराचार्य संस्थान के महानिदेशक टी.पी. सिंह ने प्रधानमंत्री गति शक्ति परियोजना के उद्देश्यों, उपलब्धियों और भविष्य की संभावनाओं से अवगत कराते हुए कहा कि पीएम गति शक्ति ने विभिन्न विभागों के अलग-अलग डाटा को एकीकृत कर कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी, तेज़ और प्रभावी बनाया है। अब किसी भी भू-भाग की स्वामित्व स्थिति, भूमि का प्रकार (सरकारी, निजी, वन, पंचायत आदि) और उससे संबंधित सभी तकनीकी लेयर्स एक क्लिक में उपलब्ध हो जाती हैं। उन्होंने बताया कि पहले विभाग अपने-अपने नक्शे अलग स्केल और फॉर्मेट में बनाते थे, जिससे योजना निर्माण में कठिनाई होती थी, लेकिन अब सभी डेटा-सेट तक पहुंच सुनिश्चित कर एकीकृत प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराया गया है। सिंह ने प्रधानमंत्री गतिशक्ति परियोजना विकसित करने में मुख्य सचिव  अनुराग जैन के महत्वपूण योगदान का उल्लेख भी किया।
महानिदेशक सिंह ने कहा कि इस परियोजना में जियोस्पेशल टेक्नोलॉजी, आईटी, स्पेस टेक्नोलॉजी, मशीन लर्निंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी अत्याधुनिक तकनीकों को एक साथ जोड़ा गया है। सभी सॉफ्टवेयर और टूल्स मध्यप्रदेश में ही विकसित किए जा रहे हैं, जिससे समय और लागत की बचत के साथ राज्य की तकनीकी क्षमता भी बढ़ी है। एनओसी और अप्रूवल प्रक्रियाओं को फेसलेस और तेज़ बनाने के लिए आवश्यक सॉफ्टवेयर लगभग तैयार हैं, जिनका प्रयोग कुछ राज्यों में प्रारंभ भी हो चुका है। सिंह ने बताया कि मध्यप्रदेश में पीएम गति शक्ति को बढ़ावा देने में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह के सही अलाइनमेंट, पारदर्शिता के प्रति प्रतिबद्धता और पर्यावरण पर ध्यान ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
अभियंता केवल तकनीकी निर्माणकर्ता नहीं, विकास के मार्गदर्शक भी
अखिल भारतीय संयोजक एवं पर्यावरणविद् गोपाल आर्य ने कार्यशाला में कहा कि ‘पर्यावरण से समन्वय’ विषय पर आयोजित यह कार्यक्रम न केवल मध्यप्रदेश में, बल्कि संभवतः पूरे देश में अपनी तरह का पहला प्रयास है, जो आने वाले समय में एक नया ट्रेंड स्थापित करेगा। उन्होंने स्वयं को भी अभियंता बताते हुए कहा कि किसी भी देश के विकास के लिए विश्वस्तरीय अधोसंरचना  का होना अनिवार्य है, परंतु यह विकास पर्यावरण के संतुलन के साथ आगे बढ़ने पर ही सार्थक होगा। उन्होंने कहा कि अभियंता केवल तकनीकी निर्माणकर्ता नहीं, बल्कि समाज और आने वाली पीढ़ियों के लिए विकास के मार्गदर्शक होते हैं। यदि किसी देश को विकासशील से विकसित राष्ट्र बनना है, तो उसका इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत और पर्यावरण-अनुकूल होना चाहिए। उन्होंने कहा कि पेड़ों की कमी से कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषण घटेगा, जिससे ग्रीन हाउस गैसें बढ़ेंगी, ओजोन परत को नुकसान होगा, ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याएं गहराएंगी। आर्य ने एक मार्मिक कहानी के माध्यम से समझाया कि प्रकृति हमें जीवनभर निःशुल्क वायु, जल और अन्य संसाधन देती है, परंतु हममें से अधिकांश लोग कभी उसे लौटाने के बारे में नहीं सोचते। उन्होंने वृक्षारोपण को केवल अभियान नहीं, बल्कि सात पीढ़ियों के लिए जीवन बीमा बताया, जो निरंतर ऑक्सीजन, आश्रय और संसाधन प्रदान करता है। उन्होंने जैव विविधता, जल संरक्षण और प्लास्टिक का उपयोग कम करने की दिशा में जनभागीदारी को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता बताई। लोक निर्माण विभाग के प्रमुख सचिव सुखवीर सिंह ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की एवं प्रबंध संचालक एमपीआरडीसी भरत यादव द्वारा आभार प्रदर्शित किया।
तकनीकी सत्र में पीएम गति शक्ति योजना एवं आधुनिक व पर्यावरण अनुकूल तकनीको पर दी गई जानकारी
संगोष्ठी के दूसरे सत्र में भास्कराचार्य संस्थान के महानिदेशक टी.पी. सिंह के साथ पीएम गति शक्ति योजना पर प्रश्न-उत्तर सत्र आयोजित हुआ। इस दौरान विभाग के लिए विकसित मोबाइल ऐप, जीआईएस पोर्टल, लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम और इंटीग्रेशन सॉल्यूशंस पर विशेषज्ञों ने प्रस्तुतीकरण दिया। इन डिजिटल नवाचारों से योजना, मॉनिटरिंग, रिपोर्टिंग और संसाधन प्रबंधन में पारदर्शिता व दक्षता में वृद्धि होगी। कार्यशाला में प्रदेशभर के लगभग 1700 अभियंता प्रत्यक्ष एवं वर्चुअल रूप से शामिल हुए।

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