प्रदेश में रीवाइल्डिंग से संतुलित होगी वाइल्डलाइफ़ इकोलॉजी
मध्यप्रदेश में स्वैम्प डियर (बारहसिंगा) सहित कई प्रजातियों के संरक्षण और संवर्द्धन के लिए पुनर्वास एवं पुनर्प्रवेश कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।
भोपाल : मध्यप्रदेश में स्वैम्प डियर (बारहसिंगा) सहित कई प्रजातियों के संरक्षण और संवर्द्धन के लिए पुनर्वास एवं पुनर्प्रवेश कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। वैज्ञानिक पद्धति से इन प्रजातियों को उनके प्राकृतिक आवास में पुनः स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा इन प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए ‘रीवाइल्डिंग’ की अभिनव पहल की गई है।
रीवाइल्डिंग का उद्देश्य वाइल्डलाइफ़ इकोलॉजी को संतुलित करना, लुप्त हो रही प्रजातियों को पुनर्जीवित करना, संकटग्रस्त प्रजातियों का संरक्षण करना और जैव विविधता को बढ़ावा देना है। प्रदेश में की गई यह पहल अन्य राज्यों के लिए वन संरक्षण का एक मॉडल बनेगी।
रीवाइल्डिंग का अर्थ है – प्रकृति को उसकी मूल अवस्था में लौटाना। इसके लिए जंगलों में उन प्रजातियों को पुनः बसाया जाता है, जिनके बिना पारिस्थितिकी तंत्र अधूरा रहता है। इसमें शिकारी और शिकार दोनों प्रजातियों को शामिल किया जाता है। माना जाता है कि इन प्रजातियों के अभाव में जंगल का आहार-संतुलन बिगड़ जाता है और प्राकृतिक जीवन-चक्र टूट जाता है।
‘टाइगर स्टेट’ कहलाने वाला मध्यप्रदेश जैव विविधता से समृद्ध है, इसके बावजूद कई प्रजातियाँ विलुप्ति की कगार पर हैं। प्रदेश के वनों में स्वैम्प डियर (बारहसिंगा) की संख्या लगातार घट रही है। साथ ही बाघ और तेंदुए के बीच संतुलन भी प्रभावित हो रहा है। विलुप्त होती प्रजातियों को समय रहते पुनर्स्थापित कर जंगलों और उनके प्राकृतिक संतुलन को बनाए रखा जा सकता है।
वन विभाग ने रीवाइल्डिंग को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की योजना बनाई है। स्वैम्प डियर और अन्य प्रजातियों को पुनः प्राकृतिक आवास में बसाया जाएगा। इसमें केवल किसी एक जानवर पर ध्यान न देकर, पूरे जंगल, घासभूमि और नदी के परिदृश्य पर ध्यान केंद्रित कर पशुओं का पुनर्वास किया जाएगा। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA), वन अनुसंधान संस्थान तथा अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञ भी इस मिशन में सहयोग कर रहे हैं।
जनजातीय और ग्रामीण समुदायों को भी इस कार्यक्रम से जोड़ा जा रहा है, जिससे उन्हें वन्यजीव पर्यटन के साथ ही आजीविका के नए अवसर मिल सकें। वन्यजीव वैज्ञानिकों का कहना है कि रीवाइल्डिंग केवल जानवरों को बचाने का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि जलवायु परिवर्तन से निपटने का एक सशक्त उपाय भी है। जंगल कार्बन भंडारण बढ़ाते हैं और कार्बन फुटप्रिंट कम करने में मदद करते हैं। इससे जल एवं मृदा संरक्षण भी संभव होता है, क्योंकि इकोलॉजी के संतुलन से प्राकृतिक संसाधन सुरक्षित बने रहते हैं।
रीवाइल्डिंग से न केवल वन्य पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में मदद मिलेगी, बल्कि बिना मानवीय हस्तक्षेप के प्राकृतिक चक्र भी सक्रिय रहेगा। राज्य सरकार की यह पहल राष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अब तक वन संरक्षण की नीतियाँ प्रायः किसी एक प्रजाति तक सीमित रहती थीं, किंतु रीवाइल्डिंग का फोकस संपूर्ण वाइल्डलाइफ़ इकोलॉजी पर है। यह प्रक्रिया अन्य राज्यों के लिए भी इकोलॉजी संतुलन का एक आदर्श मॉडल बन सकती है।
प्रदेश में रीवाइल्डिंग का यह प्रयास संकेत देता है कि सरकार और समाज मिलकर अब वन और वन्यजीव संरक्षण से आगे बढ़कर प्रकृति को उसकी मूल अवस्था में लौटाने की दिशा में अग्रसर हैं। इस पहल से मध्यप्रदेश वन्यजीव संरक्षण में अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित होगा।
