जनजातीय भाषाई विरासत को चिरस्थायी बनाने "आदि वाणी"
जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने जनजातीय भाषाओं, बोलियों और संस्कृति के संरक्षण के लिए विकसित किए गए जनजातीय भाषा अनुवाद टूल "आदि वाणी" की अभूतपूर्व पहल के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का आभार व्यक्त किया है।
भोपाल : जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने जनजातीय भाषाओं, बोलियों और संस्कृति के संरक्षण के लिए विकसित किए गए जनजातीय भाषा अनुवाद टूल "आदि वाणी" की अभूतपूर्व पहल के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का आभार व्यक्त किया है।
भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा जनजातीय गौरव वर्ष के अवसर पर सोमवार को नई दिल्ली में "आदि वाणी" का बीटा वर्जन जारी किया गया। इस अवसर पर केन्द्रीय जनजातीय राज्य मंत्री श्री दुर्गादास उइके की अध्यक्षता में "आदि वाणी" का शुभारंभ हुआ।
क्या है "आदि वाणी"
"आदि वाणी" एक AI आधारित अनुवाद उपकरण है। यह जनजातीय समुदायों को जोड़ने और उनकी सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित करने की पहल है, जो भाषाओं के डिजिटलीकरण में सहायक सिद्ध होगी।
यह उपकरण मूल भाषाओं में शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और शासन से जुड़ी जानकारियाँ उपलब्ध कराने में मददगार होगा। इसके अलावा यह जनजातीय उद्यमिता को बढ़ावा देगा तथा शोधकर्ताओं के लिए भी बहुमूल्य ज्ञान का स्रोत साबित होगा।
"आदि वाणी" को IIT दिल्ली के नेतृत्व में BITS पिलानी, IIIT हैदराबाद, IIIT नवा रायपुर तथा झारखंड, ओडिशा, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और मेघालय के जनजातीय अनुसंधान संस्थानों के सहयोग से विकसित किया गया है।
उपलब्धता
"आदि वाणी" – AI आधारित यह उपकरण वेब पोर्टल
(https://adivaani.tribal.gov.in) पर उपलब्ध है। इसका मोबाइल ऐप का बीटा संस्करण शीघ्र ही प्ले स्टोर और iOS पर भी उपलब्ध होगा।
बीटा लॉन्च चरण में यह फिलहाल संथाली (ओडिशा), भीली (मध्यप्रदेश), मुंडारी (झारखंड) और गोंडी (छत्तीसगढ़) भाषाओं को सपोर्ट करता है।
प्रमुख विशेषताएँ
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हिंदी, अंग्रेज़ी और जनजातीय भाषाओं के बीच तत्काल टेक्स्ट और स्पीच अनुवाद की सुविधा।
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छात्रों और प्रारंभिक शिक्षार्थियों के लिए इंटरएक्टिव भाषा सीखने के मॉड्यूल।
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लोककथाओं, मौखिक परंपराओं और सांस्कृतिक धरोहरों का डिजिटलीकरण।
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स्वास्थ्य संबंधी जानकारी और प्रधानमंत्री के भाषणों सहित महत्वपूर्ण सरकारी संदेशों के सबटाइटल जनजातीय भाषाओं में उपलब्ध।
