चीन में आ गया संकट, भारत की बारी कब, हम कितने तैयार?
भारत में भी यह डेमोग्राफिक बदलाव शुरू हो चुका है,
हालिया रिपोर्ट्स और मीडिया विमर्श (जैसे News18) के अनुसार, चीन जिस बड़े संकट का सामना कर रहा है, वह है घटती फर्टिलिटी रेट और तेजी से बूढ़ी होती आबादी (Demographic Crisis)। चीन, जापान और कई यूरोपीय देशों में जन्म दर इतनी कम हो गई है कि वहां बुजुर्गों की आबादी बच्चों और युवाओं से अधिक हो रही है। चीन में कामकाजी आबादी (Working-age Population) घटने लगी है, जिससे उसकी आर्थिक रफ्तार और सामाजिक सुरक्षा तंत्र पर भारी दबाव आ गया है।
भारत की बारी कब?
भारत में भी यह डेमोग्राफिक बदलाव शुरू हो चुका है, लेकिन हमारे पास अभी समय है:
फर्टिलिटी रेट में गिरावट: भारत की कुल प्रजनन दर (TFR) भी गिरकर 1.9 पर आ गई है, जो कि जनसंख्या स्थिरता के आवश्यक मानक (2.1) से कम है।
कामकाजी आबादी का संकट कब? हालांकि भारत वर्तमान में अपनी सबसे बड़ी युवा आबादी (Demographic Dividend) के दौर से गुजर रहा है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार, अगले कुछ दशकों (अनुमानतः 2040-2050 के बाद) में भारत को भी कामकाजी आबादी में कमी और बुजुर्गों की आबादी बढ़ने की चुनौती का सामना करना पड़ेगा।
हम इस संकट से निपटने के लिए कितने तैयार हैं?
क्या भारत एक बड़ी बुजुर्ग आबादी और घटती कामकाजी आबादी का बोझ उठाने के लिए तैयार है? वर्तमान स्थिति को तीन प्रमुख पैमानों पर समझा जा सकता है
डेमोग्राफिक डिविडेंड का पूरा इस्तेमाल नहीं: भारत के पास अभी युवाओं की भारी फौज है, लेकिन चुनौती उन्हें सही कौशल (Skilling) और रोजगार देने की है। यदि हम वर्तमान युवा पीढ़ी की क्षमता का पूरा उपयोग करके देश को विकसित नहीं बना पाए, तो भविष्य में यह आबादी देश के लिए बड़ी आर्थिक चुनौती बन सकती है।
कमजोर सामाजिक सुरक्षा (Social Security): भारत में एक बहुत बड़ा हिस्सा असंगठित क्षेत्र (Unorganized Sector) में काम करता है, जिसके पास बुढ़ापे के लिए कोई ठोस पेंशन या सामाजिक सुरक्षा कवरेज नहीं है। चीन जैसी स्थिति आने पर हमारे बुजुर्गों की चिकित्सा और जीवन-यापन का खर्च संभालना बेहद मुश्किल होगा।
स्वास्थ्य देखभाल (Healthcare) का बुनियादी ढांचा: बढ़ती उम्र के साथ स्वास्थ्य संबंधी जरूरतें बढ़ेंगी। भारत का हेल्थकेयर सिस्टम अभी भी सभी नागरिकों को सस्ती और उच्च स्तरीय जेरियाट्रिक केयर (बुजुर्गों की देखभाल) देने के लिए पूरी तरह तैयार नहीं है।
निष्कर्ष: भारत अभी संकट में नहीं है क्योंकि हमारी बहुसंख्यक आबादी युवा है। लेकिन अगर हमने अपनी नीतियों में समय रहते बदलाव नहीं किया, तो भविष्य में चीन जैसा संकट भारत के लिए और भी अधिक विनाशकारी साबित हो सकता है।
