लेज़ के पैकेट में 15 ग्राम की जगह सिर्फ 4 ग्राम चिप्स!
उपभोक्ता संरक्षण आयोग ने पेप्सिको पर भारी जुर्माना लगाया
निज संवाददाता : चिप्स बनाने वाली एक मशहूर कंपनी को कोर्ट में बड़ा झटका लगा है। जयपुर के एक उपभोक्ता संरक्षण आयोग ने पेप्सिको इंडिया होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड को दोषी ठहराया है। इस खबर ने सोशल मीडिया पर काफी हलचल मचा दी है। कोर्ट ने यह अहम फैसला एक उपभोक्ता की शिकायत पर सुनाया है। उपभोक्ता का आरोप था कि लेज़ चिप्स के एक पैकेट (जिसकी कीमत 5 रुपए थी) में 15 ग्राम के बजाय केवल 4 ग्राम चिप्स ही थे।
जिला उपभोक्ता संरक्षण आयोग-II (जिसमें अध्यक्ष अशोक शर्मा और सदस्य अजय कुमार व सुप्रिया अग्रवाल शामिल हैं) ने इसी मामले में रिटेलर, 'मेट्रो कैश एंड कैरी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड' के खिलाफ दर्ज शिकायत को खारिज कर दिया।
न्यूज़ पोर्टल 'लाइवलॉ.इन' की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह मामला 'जालान बिल्डिंग एंड हार्डवेयर स्टोर' के मालिक चंद्रमान जालान ने दर्ज कराया था। जालान का कहना है कि 10 नवंबर 2020 को उन्होंने अपने घर पर मेहमानों के लिए 'मेट्रो कैश एंड कैरी' से कुछ खाने-पीने का सामान खरीदा था, जिसमें 5 रुपए वाला लेज़ चिप्स का एक पैकेट भी शामिल था। उन्हें इस खरीदारी के लिए एक इनवॉइस (बिल) भी दिया गया था। जालान ने बताया कि जब वे मेहमानों को चिप्स परोसने लगे, तो उन्हें पैकेट कुछ ज़्यादा ही हल्का लगा। कुछ गड़बड़ होने के शक में उन्होंने पैकेट का वजन किया, तो पता चला कि पैकेट पर 15 ग्राम चिप्स होने का दावा किया गया था, जबकि असल में उसमें सिर्फ 4 ग्राम चिप्स ही थे।
उपभोक्ता ने पहले इस मुद्दे को लेकर 'मेट्रो' से संपर्क किया, लेकिन उनका कहना है कि कंपनी ने उनकी शिकायत का संतोषजनक समाधान नहीं निकाला। इसके बाद, 6 अप्रैल 2022 को उन्होंने एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई, जिसमें उन्होंने सेवा में कमी और अनुचित व्यापार प्रथाओं का आरोप लगाया।
इस मामले में 'मेट्रो' ने तर्क दिया कि अगर चिप्स की मात्रा में कोई कमी थी, तो ऐसा मैन्युफैक्चरिंग (निर्माण) प्रक्रिया के दौरान हुआ होगा। इसलिए, इसकी जिम्मेदारी निर्माता (मैन्युफैक्चरर) की है, न कि रिटेलर की। इस मामले में पेप्सिको को भी नोटिस भेजा गया था। हालांकि, नोटिस मिलने के बावजूद कंपनी आयोग के सामने पेश नहीं हुई; जिसके चलते उनकी गैर-मौजूदगी में ही कार्यवाही आगे बढ़ी। यह मामला 'एकतरफा' तरीके से आगे बढ़ा, जिसका अर्थ है कि सभी पक्षों को अपनी बात रखने का मौका नहीं मिला। शिकायतकर्ता द्वारा पेश किए गए सबूतों—जिसमें खरीद की रसीदें और उत्पाद के वजन से जुड़े आरोप शामिल थे—की जांच करने के बाद, आयोग ने रिटेलर (खुदरा विक्रेता) के खिलाफ की गई शिकायत को खारिज कर दिया। वहीं दूसरी ओर, आयोग ने पेप्सिको के खिलाफ शिकायत को सही माना और कंपनी को मुआवजा देने का आदेश दिया।
आयोग के निर्देश के अनुसार, कंपनी को उपभोक्ता को पैकेट की कीमत यानी 5 रुपये वापस करने होंगे। इसके अलावा, इस राशि पर 6 अप्रैल 2022 से लेकर भुगतान की तारीख तक 6 फीसदी सालाना की दर से ब्याज भी देना होगा। साथ ही, आयोग ने मानसिक परेशानी के लिए 5,000 रुपये और कानूनी कार्यवाही के खर्च के तौर पर 3,000 रुपये देने का आदेश दिया है। कुल 8,000 रुपये की यह राशि एक महीने के भीतर चुकानी होगी। यदि तय समय सीमा के भीतर भुगतान नहीं किया जाता है, तो इस 8,000 रुपये की राशि पर भी 6 फीसदी सालाना की दर से ब्याज लगेगा, जिसकी गणना आदेश की तारीख से लेकर वास्तविक भुगतान की तारीख तक की जाएगी। संक्षेप में कहें तो, चिप्स के महज 5 रुपये के एक पैकेट से जुड़े विवाद के मामले में, आयोग ने पेप्सिको को कुल 8,005 रुपये और उस पर लागू होने वाला ब्याज चुकाने का आदेश दिया है।
