दिवाली के बाद प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों की बढ़ सकती है पेंशन
निज संवाददाता : दीवाली के बाद प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों के लिए एक खास 'तोहफा' आने वाला है। इसके तहत उनकी पेंशन की रकम बढ़ सकती है। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार इस दिशा में कदम उठा सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 19 नवंबर को गुजरात के गिर में 'एम्प्लॉयीज़ प्रोविडेंट फंड ऑर्गनाइज़ेशन' (ईपीएफओ) के बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज़ की बैठक होने वाली है, जिसमें इस मुद्दे पर चर्चा होने की उम्मीद है।
ईपीएफओ वह संस्था है जो प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों के प्रोविडेंट फंड की देखरेख करती है। रिटायरमेंट के लिए बनाए गए इस फंड के दो हिस्से होते हैं-एम्प्लॉयीज़ प्रोविडेंट फंड (ईपीएफ) और एम्प्लॉयीज़ पेंशन स्कीम (ईपीएस)। पूरी संभावना है कि गुजरात में होने वाली ईपीएफओ बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज़ की बैठक में ईपीएस के तहत मिलने वाली न्यूनतम मासिक पेंशन को बढ़ाने पर मुख्य रूप से चर्चा होगी।
देश भर के कई मजदूर संगठन लंबे समय से ईपीएस के तहत न्यूनतम मासिक पेंशन बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। सितंबर 2014 में, केंद्र सरकार ने इस रकम को 1,000 रुपए प्रति माह तय किया था। मजदूर संगठनों का तर्क है कि बढ़ती महंगाई और जीवन-यापन के बढ़ते खर्चों को देखते हुए यह रकम बहुत कम है।
इसलिए, उन्होंने मांग की है कि न्यूनतम मासिक पेंशन को बढ़ाकर 7,500 रुपए किया जाए और पेंशन ढांचे में महंगाई भत्ता (डीए) को भी शामिल किया जाए। मोदी सरकार पहले ही भरोसा दिला चुकी है कि इन मुद्दों पर विचार किया जाएगा। इस साल सितंबर में, केंद्र सरकार ने ईपीएफओ सब्सक्राइबर्स के लिए अधिकतम मासिक वेतन सीमा को 15,000 रुपए से बढ़ाकर 25,000 रुपए कर दिया था।
पिछले फरवरी में, केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया ने प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों की पेंशन के मुद्दे पर मीडिया से बात की थी। उन्होंने कहा-सरकार ईपीएफओ और कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईएस) के तहत वेतन सीमा बढ़ाने, और साथ ही ईपीएस के अंतर्गत न्यूनतम पेंशन में वृद्धि करने के संबंध में निर्णय लेगी।
