अफगानिस्तान में भूकंप के झटके

यह भूकंप भारतीय समयानुसार सुबह 6:09 बजे आया

अफगानिस्तान में भूकंप के झटके

काबुल : अफगानिस्तान में एक बार फिर भूकंप के झटके महसूस किए गए। शुक्रवार, तड़के काबुल और आसपास के क्षेत्रों में 3.7 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (एनसीएस) के अनुसार, यह भूकंप भारतीय समयानुसार सुबह 6:09 बजे आया, जिसका केंद्र जमीन से 80 किलोमीटर की गहराई पर था। झटके हल्के होने के कारण फिलहाल किसी नुकसान या जनहानि की खबर नहीं मिली है। पिछले कुछ हफ्तों में अफगानिस्तान में यह चौथा भूकंप है। इससे पहले मंगलवार को 4.3 तीव्रता का भूकंप आया था। इसके अलावा, 17 अक्टूबर को उत्तरी अफगानिस्तान में 5.5 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के मुताबिक, वह भूकंप खांडूद से 47 किलोमीटर उत्तर-उत्तर-पश्चिम में, 43 किलोमीटर की गहराई पर था। बार-बार भूकंप आने से इस क्षेत्र की भूगर्भीय अस्थिरता उजागर होती है। भूकंप की गहराई का खतरे से गहरा संबंध है। विशेषज्ञों का कहना है कि उथले भूकंप, जो सतह के करीब आते हैं, गहरे भूकंपों की तुलना में अधिक खतरनाक होते हैं। इनकी तरंगें तेजी से सतह तक पहुंचती हैं, जिससे इमारतों को नुकसान और जनहानि का जोखिम बढ़ जाता है। हालांकि, इस बार का भूकंप 80 किलोमीटर की गहराई पर था, जिसके कारण इसका प्रभाव सीमित रहा।अफगानिस्तान का यह क्षेत्र भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों के मिलन स्थल पर स्थित है, जो इसे भूकंप संभावित जोन बनाता है। यही कारण है कि अफगानिस्तान, पाकिस्तान और उत्तरी भारत में बार-बार भूकंप आते हैं। भूवैज्ञानिकों का मानना है कि इन टेक्टोनिक गतिविधियों के कारण भविष्य में भी इस क्षेत्र में भूकंप का खतरा बना रहेगा। भारत इस क्षेत्र में मानवीय सहायता और स्थिरता के लिए सक्रिय है। हाल ही में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पार्वथानेनी ने कहा कि भारत अफगान लोगों को मानवीय सहायता और क्षमता निर्माण पर ध्यान दे रहा है। भारत ने संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन (यूएनएएमए) के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई है। यह सहयोग अफगानिस्तान में विकास और शांति के लिए भारत की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।फिलहाल, काबुल में स्थिति सामान्य है, लेकिन बार-बार आने वाले भूकंप इस क्षेत्र में भूकंपीय जोखिमों की याद दिलाते हैं। स्थानीय प्रशासन और अंतरराष्ट्रीय संगठन भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए तैयारियों को मजबूत कर रहे हैं।

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