बंगाल में एसआईआर के बाद 28 फरवरी को जारी होगी मतदाता सूची

बंगाल में एसआईआर के बाद 28 फरवरी को जारी होगी मतदाता सूची


निज संवाददाता : पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण ( एसआईआर ) को लेकर सियासी हलचल तेज है। सुप्रीम कोर्ट ने 28 फरवरी तक अंतिम मतदाता सूची जारी करने का स्पष्ट आदेश दिया है। इस बीच पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) मनोज अग्रवाल ने गुरुवार को जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि फाइनल वोटर लिस्ट तय समय पर जारी होगी। इसमें 16 दिसंबर को जारी विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के मसौदा रोल में शामिल सभी 7.08 करोड़ नाम बरकरार रहेंगे। लेकिन इसमें दो अतिरिक्त फीचर शामिल रहेंगे।
मनोज अग्रवाल ने कहा कि जैसे प्रत्येक बार सामान्य सूची जारी होती है, ठीक उसी तरह 28 फरवरी को फाइनल सूची जारी होगी, लेकिन इसमें दो फीचर और रहेंगे। जो केस न्यायिक निर्णय के लिए गए हैं,  उनके ऊपर 'न्यायिक निर्णय के अधीन'  लिखा होगा। वहीं जो डिलीट हुए हैं, उनके ऊपर 'डिलीटेड' लिखा होगा। बाकी चीजें सामान्य रहेंगी। उन्होंने बताया कि पूरे राज्य में वोटिंग का आंकड़ा लगभग 60,06,675 है। वहीं, दूसरी तरफ कलकत्ता हाईकोर्ट ने 200 न्यायिक अधिकारियों की मांग की है, जिनमें 100-100 अधिकारी ओडिशा हाईकोर्ट और झारखंड हाईकोर्ट से होंगे। इन अधिकारियों को उन न्यायिक अधिकारियों की टीम में शामिल किया जाएगा, जिन्हें 'लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी' (तार्किक असंगति) श्रेणी में पहचाने गए मतदाताओं के दस्तावेजों की जांच और फैसला करने के लिए पहले से नियुक्त किया गया है।
पड़ोसी राज्यों से 200 न्यायिक अधिकारियों को बुलाने का फैसला कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में लिया गया। बैठक में पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल, मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती, कार्यवाहक पुलिस महानिदेशक पीयूष पांडे, कोलकाता पुलिस आयुक्त सुप्रतिम सरकार और पश्चिम बंगाल के विशेष रोल पर्यवेक्षक सुब्रत गुप्ता भी मौजूद थे।
यह एसआईआर अभियान  पश्चिम बंगाल  में मतदाता सूची को शुद्धिकरण करने के लिए चुनाव आयोग की बड़ी पहल है, जिसमें लाखों दावे और आपत्तियां आईं। कलकत्ता हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की सक्रियता से प्रक्रिया तेज हुई है। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में ओडिशा और झारखंड से 200 न्यायिक अधिकारियों की तैनाती की अनुमति दी, ताकि 80 लाख से अधिक दावों का सत्यापन समय पर हो सके।

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