कलकत्ता हाई कोर्ट ने केंद्र को दिया आदेश
कहा- बांग्लादेश भेजी गई सोनाली खातून समेत 6 लोगों को चार हफ्ते में भारत लाएं
निज संवाददाता : कलकत्ता हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को आदेश दिया है कि वह बंगाल के बीरभूम जिले की सोनाली खातून और अन्य पांच लोगों को चार सप्ताह के भीतर भारत वापस लाए। इन छह लोगों को तीन महीने पहले अवैध प्रवासी करार देकर बांग्लादेश भेज दिया गया था। अदालत ने दिल्ली फॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस (एफआरआरओ) का 26 जून का आदेश रद्द कर दिया। इसी के आधार पर इन सभी को दिल्ली से हिरासत में लेकर गुवाहाटी भेजा गया और फिर बांग्लादेश में धकेल दिया गया था। कोर्ट ने केंद्र की उस अपील को भी खारिज कर दिया जिसमें इस आदेश पर रोक लगाने की मांग की गई थी।
न्यायमूर्ति तपब्रत चक्रवर्ती और न्यायमूर्ति रीतेाब्रतो कुमार मित्रा की खंडपीठ ने यह आदेश सोनाली खातून के पिता भोदू शेख की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। अदालत ने दिल्ली पुलिस को फटकार लगाई और कहा कि पुलिस ने बेहद जल्दबाजी और अतिउत्साह में कार्रवाई की। इससे निष्पक्षता और तार्किकता जैसे संवैधानिक अधिकारों को ठेस पहुंची। बता दें कि सोनाली इस समय नौ महीने की गर्भवती है। उसके पति दानिश शेख और आठ साल का बेटा सबीर वर्तमान में बांग्लादेश की जेल में बंद हैं। इनके साथ तीन अन्य लोग भी 21 अगस्त को गैरकानूनी तरीके से बांग्लादेश में प्रवेश करने के आरोप में गिरफ्तार किए गए थे।
सरकार की इस दलील को अदालत ने खारिज कर दिया कि विदेशी अधिनियम के तहत यह जिम्मेदारी आरोपित व्यक्ति की है कि वह साबित करे कि वह भारतीय है। अदालत ने कहा कि इस कानून के तहत कार्यपालिका को किसी भी व्यक्ति को मनमाने ढंग से विदेशी घोषित करने का अधिकार नहीं है। दिल्ली पुलिस की उस रिपोर्ट पर भी कोर्ट ने सवाल उठाया जिसमें कहा गया था कि सोनाली ने 1998 में अवैध रूप से भारत में प्रवेश किया था। कोर्ट ने साफ किया कि सोनाली के आधार कार्ड और पैन कार्ड में उसकी उम्र 26 साल दर्ज है, जिससे यह दावा निराधार साबित होता है। इसके अलावा, कोर्ट ने पुलिस के इस तर्क को भी खारिज कर दिया कि सोनाली और अन्य ने खुद को बांग्लादेशी मान लिया था। कोर्ट ने कहा कि यह दबाव या बलपूर्वक कराई गई हो सकती है।
