‘लिफाफा’ सिंबल को लेकर आईएसएफ और ऋतब्रत गुट आमने-सामने

नौशाद सिद्दीकी ने दी कोर्ट में जाने की धमकी

‘लिफाफा’ सिंबल को लेकर आईएसएफ और ऋतब्रत गुट आमने-सामने

निज संवाददाता : पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के दो गुटों के बीच रार के बीच अब चुनाव चिन्ह ‘लिफाफा’ को लेकर घमासान मचा है। बंगाल में दो सीटों नंदीग्राम और रेजिनगर उपचुनाव से पहले नई तकरार शुरू हो गई है। इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आईएसएफ) ने पिछले विधानसभा चुनाव में ‘लिफाफा’ सिंबल पर चुनाव लड़ा था। हालांकि, नंदीग्राम और रेजिनगर के उपचुनावों में उन्हें वही लिफाफा सिंबल खोना पड़ा है। चुनाव आयोग ने लिफाफा सिंबल ऋतब्रत डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस को दे दिया है। इस वजह से आईएसएफ  को लिफाफा सिंबल के साथ उपचुनाव लड़ने का मौका नहीं मिल रहा है। आईएसएफ  के विधायक नौशाद सिद्दीकी ने चेतावनी दी है कि वे आयोग के इस फैसले के खिलाफ कोर्ट जाएंगे।
इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आईएसएफ)  ने 2021 में पहली बार चुनाव लड़ा था। आईएसएफ  ने 2021 का विधानसभा चुनाव, 2024 का लोकसभा चुनाव और 2026 का विधानसभा चुनाव लिफाफा सिंबल के साथ लड़ा था। सूत्रों का कहना है कि आईएसएफ  एक रजिस्टर्ड पॉलिटिकल पार्टी है, लेकिन अभी तक चुनाव आयोग ने इसे स्टेट या नेशनल पार्टी के तौर पर मान्यता नहीं दी है। इस वजह से उनका सिंबल तय नहीं है। ऐसे में  चुनाव आयोग ऋतब्रत गुट को लिफाफा सिंबल आवंटित कर दिया है। आईएसएफ  को दूसरा सिंबल चुनना होगा।
आईएसएफ विधायक  नौशाद सिद्दीकी ने कहा कि वे कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। उन्होंने कहा- हमने नंदीग्राम में पहले ही कैंडिडेट उतार दिए हैं। हमने सारी जानकारी कमीशन को दे दी है। फिर भी चुनाव आयोग यह सिंबल कैसे दे रहा है, यही सवाल है। हम इसके खिलाफ लीगल एक्शन लेंगे। हमने इस बारे में कमीशन को पहले ही पत्र भेज दिया है।
ऋतब्रत बनर्जी ने लिफाफे के निशान पर कहा-यह किसी का खास निशान नहीं है। रजिस्टर्ड और गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टियों की एक लिस्ट है। हम आईएसएफ  से ज्यादा संख्या में हैं। हम यह चाहते थे। हमें यह मिल गया। इसके लिए चुनाव आयोग का धन्यवाद।
इस बीच, हुमायूं कबीर की आम जनता उन्नयन पार्टी को भी रेजिनगर में बांसुरी का निशान नहीं मिल रहा है। सूत्रों के मुताबिक, उनके टेबल के निशान को निशान के तौर पर दिया जा सकता है।
दूसरी ओर कांग्रेस महासचिव के सी वेणुगोपाल ने शनिवार को कहा कि कांग्रेस पश्चिम बंगाल में नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव से अपने उम्मीदवार मिलन प्रधान को वापस नहीं लेगी और पार्टी के उम्मीदवार की गिरफ्तारी को राष्ट्रीय मुद्दा बनाएगी।
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि प्रधान को 2007 के नंदीग्राम एंटी-लैंड एक्विजिशन मूवमेंट से जुड़े एक पुराने केस के सिलसिले में शुक्रवार को गिरफ्तार किया गया था। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को नंदीग्राम उपचुनाव में प्रधान के लिए अपनी पार्टी के सपोर्ट का ऐलान किया, इसके कुछ ही घंटे बाद उनके गुट के कैंडिडेट ने मुकाबले से नाम वापस ले लिया।
वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस के उपचुनाव के लिए उन्हें समर्थन देने के तुरंत बाद प्रधान को एक पुराने केस के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया। उन्होंने कहा-ममता बनर्जी के कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन देने के एक घंटे के अंदर ही पुलिस ने उस उम्मीदवार को हिरासत में ले लिया।  उन्होंने यह भी कहा कि यह मामला 2007 के नंदीग्राम आंदोलन से जुड़ा था। गिरफ्तारी के बाद उन्हें बताया गया कि कोई असली मामला नहीं है और प्रधान को कुछ समय के लिए हिरासत में रखा गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस प्रधान पर केस हटाने और दूसरी सुविधाएं देने का ऑफर देकर चुनाव से हटने का दबाव बना रही थी।

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