कुम्हारटोली के वर्कशॉप में बढ़ी व्यस्तता

कुम्हारटोली के वर्कशॉप में बढ़ी व्यस्तता

मिंटू पाल की 26 मूर्तियां जाएंगी विदेश

दुर्गापूजा शुरू होने में अब सिर्फ तीन महीने बाकी हैं। इस बीच, उत्तर कोलकाता के प्रसिद्ध कुम्हारटोली के वर्कशॉप में मूर्तिकारों की व्यस्तता बढ़ गई है। इन्हीं में से प्रमुख हैं मशहूर मूर्तिकार मिंटू पाल। बड़ी बात यह कि बिहार के बोधगया में उनकी बनाई 100 फीट की लेटी हुई बुद्ध की मूर्ति को देखने के लिए देशभर से लोग उमड़ पड़ते हैं। देश की सबसे बड़ी बुद्ध प्रतिमा बनाने वाले मूर्तिकार मिंटू पाल ने नई मिसाल कायम की है। कुम्हारटोली में उनकी बनाई 18 दुर्गा मूर्तियां अब विदेश में पूजी जाएंगी। इनमें से कुछ ऑस्ट्रेलिया-पोलैंड में, कुछ अमेरिका-कनाडा में जाएंगी। वहीं, कुछ मध्यपूर्व के दुबई में भेजी जाएंगी। इसके अलावा एशिया तो है ही। कुम्हारटोली का मानना है कि एक ही कलाकार द्वारा एक साल में बनाई गई इतनी दुर्गा मूर्तियों का विदेश जाना अभूतपूर्व है। हालांकि यह पहली बार नहीं है जब मिंटू की मूर्तियों की मांग विदेशों में बढ़ रही है।
पिछली बार मिंटू की 14 मूर्तियां देश की सीमा पार कर गई थीं। चारों में काली प्रतिमा और लक्ष्मी-सरस्वती को शामिल कर लें तो संख्या 22 हुई। मिंटू पाल ने बताया कि इस बार दुर्गा, काली, लक्ष्मी और सरस्वती समेत कुल 26 मूर्तियां विदेश जा रही हैं। अब तक 14 मूर्तियां विमान में चढ़ चुकी हैं। दुर्गा की चार और मूर्तियां भेजे जाने का इंतजार कर रही हैं। मिंटू ने बताया कि मूर्तियां पोलैंड, थाईलैंड, सिंगापुर और स्पेन भी जाएंगी। अभी व्यस्तता का आलम यह है कि मिंटू खाना भूलकर पांच वर्कशॉप में काम कर रहे हैं। मिंटू की टीम में 18 कारीगर हैं। इनसे होने वाले लाभ की उम्मीद भी कम नहीं है। विदेश जाने वाली प्रत्येक फाइबरग्लास मूर्ति की कीमत डेढ़ लाख से तीन लाख के बीच है। मिंटू ने कहा-दरअसल मूर्तियों को ले जाने का खर्च इतना ज्यादा है कि कीमत पहुंच में रखनी पड़ती है। इस साल मिंटू की मूर्तियां कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, इटली, स्वीडन, स्पेन, फ्रांस, थाईलैंड, सिंगापुर और दुबई जा रही हैं। दुर्गा की प्रतिमाएं पहले ही कुमारतुली से अमेरिका के टेक्सास, फ्लोरिडा और न्यूजर्सी जा चुकी हैं। लेकिन इस बार मिंटू पाल काली की मूर्ति को लेकर ज्यादा उत्साहित हैं। यह पहली बार है जब मिंटू को फाटा केष्टो पूजा के लिए मूर्ति बनाने का काम सौंपा गया है। रथ दिवस के मौके पर रस्मों के अनुसार काली मूर्ति की पूजा भी की गई। इस अवसर पर तृणमूल कांग्रेस के पूर्व सांसद कुणाल घोष कुम्हारटोली की कार्यशाला में पहुंचे। मिंटू पाल ने उन्हें सब कुछ दिखाया। उन्होंने एक एल्बम में अपनी कृतियों की तस्वीरें दिखाईं। कुणाल घोष हर चीज से प्रभावित हुए। उन्होंने कहा-"सभी कृतियां अद्भुत हैं। मेरी आंखें खुशी से भर आईं।" मिंटू ने कहा-"मैं लंबे समय से फाटा केष्टो पूजा की मूर्ति बनाने का सपना देख रहा था। आखिरकार, मेरा सपना सच हो गया।" 
पहले कालीपद पाल यह मूर्ति बनाते थे। बाद में यह जिम्मेदारी उनके बेटे माधव पाल को मिली। इस साल मिंटू पाल को आर्डर मिला है। सवाल है कि मिंटू की मूर्ति की खासियत क्या है?  59 वर्षीय कलाकार ने कहा-"मैं नहीं कह सकता। वैसे, मेरे 18 सहायक होने के बावजूद मैं अपने हाथों से देवी दुर्गा की मूर्ति और आंखें बनाता हूं। इसलिए एक अलग शैली का निर्माण हुआ है।" सिर्फ शैली ही नहीं, बल्कि मिंटू की कृतियों की एक अलग मांग भी पैदा हुई है। संतोष मित्रा स्क्वायर से लेकर विवेकानंद पार्क, कुम्हारटोली पार्क से लेकर साल्टलेक एफडी ब्लॉक तक शहर की कई प्रसिद्ध पूजाओं की प्रतिमाएं बनाने की जिम्मेदारी अब टीम मिंटू के जिम्मे है। 511 रवींद्र सरणी स्थित उनके वर्कशॉप में दिन-रात प्रतिमा बनाने का काम चल रहा है।  सृजन का आनंद अभिभूत करने वाला है। अब सिर्फ तीन महीने बचे हैं।

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