कॉलेज स्ट्रीट के पुस्तक विक्रेताओं के लिए धन संग्रह अभियान
निज संवाददाता : कॉलेज स्ट्रीट के पुस्तक विक्रेताओं की मदद के लिए एक धन संग्रह अभियान शुरू किया गया है, जिन्होंने बाढ़ में अपनी आजीविका और संसाधन खो दिए हैं। कोलकाता क्रिएटिव पब्लिशर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने छोटे और मध्यम स्तर के प्रकाशन गृहों, प्रिंटिंग प्रेस और बाइंडिंग वर्कशॉप की सहायता के लिए कॉलेज स्ट्रीट रिलीफ फंड नामक एक पहल शुरू की है।
एसोसिएशन ने पाठकों, लेखकों, प्रकाशकों, सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं और पुस्तक प्रेमियों से कॉलेज स्ट्रीट के "सबसे बुरे दौर" में साथ देने की अपील की है।
एसोसिएशन ने अपनी ऑनलाइन अपील में कहा है कि यह त्रासदी बंगाल के सबसे बड़े त्योहारों-दुर्गा पूजा और अंतर्राष्ट्रीय पुस्तक मेले-से कुछ ही दिन पहले हुई है, जब पुस्तक विक्रेताओं को आमतौर पर अपनी आशा और आजीविका का नया जीवन मिलता है।
अपील में कहा गया है-इसके बजाय, वे आज निराशा के कगार पर खड़े हैं। उन लोगों के जीवन को फिर से बनाने में मदद करें जिन्होंने अपना जीवन लेखन के लिए समर्पित कर दिया है।
एसोसिएशन के एक सदस्य, मारूफ हुसैन ने कहा कि अमूल्य पांडुलिपियां, दुर्लभ पुस्तकें और महत्वपूर्ण मशीनें हमेशा के लिए खो गई हैं और नुकसान पहले ही कई करोड़ रुपये में पहुंच चुका है।
हुसैन ने कहा-जिन प्रकाशनों का पाठक वर्ग व्यापक है, वे कुछ रुकावटों के बाद भी नुकसान की भरपाई कर सकते हैं। बड़े प्रकाशन गृह बीमा कवर का खर्च उठा सकते हैं। हम छोटे और मझोले प्रकाशकों के बारे में चिंतित हैं। वे नुकसान से उबरने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। हम चाहते हैं कि हम सब इन प्रकाशकों के साथ खड़े हों, जो सबसे ज़्यादा पीड़ित हैं। बता दें कि हुसैन का प्रकाशन गृह, अभिजन, बंकिम चटर्जी स्ट्रीट पर है।
मालूम हो कि बीते सोमवार रात और मंगलवार सुबह के बीच हुई रिकॉर्ड बारिश ने कालेज स्ट्रीट बोई पाड़ा को डुबो दिया। इससे उन पुस्तक विक्रेताओं और प्रकाशकों को गहरा झटका लगा, जो त्योहारी सीज़न में अच्छी बिक्री की उम्मीद कर रहे थे।
प्लेटफ़ॉर्म प्रकाशन गृह के तन्मय कोले ने कहा कि बारिश के पानी में उनकी आधी किताबें भीग गई थीं। कोले जैसे छोटे प्रकाशक अक्सर बीमा का खर्च नहीं उठा पाते। उन्होंने कहा-अगर धन उगाहने के अभियान से कुछ मदद मिलती है, तो हम बहुत आभारी होंगे।
कलकत्ता विश्वविद्यालय के पास एक पुस्तक विक्रेता ने कहा कि वे अभी भी सड़कों पर धूप में किताबें सुखाने की कोशिश कर रहे हैं, इस उम्मीद में कि बाद में उन्हें रियायती दामों पर बेचा जा सके। उन्होंने कहा-ताज़ा संकट ने हमें मुश्किल में डाल दिया है। हम हर संभव मदद की कोशिश कर रहे हैं।
गौरतलब है कि इस अभियान में अब तक ₹50,000 जुटाए जा चुके हैं।
