कैथल में बोले यूपी के सीएम योगी

सोंगल की भूमि ने हर युग में अपना प्रभाव दिखाया

कैथल में बोले यूपी के सीएम योगी

सोंगल: कैथल जिले के सोंगल गांव स्थित सिद्ध बाबा मुकुट नाथ जी प्राचीन तोपस्थली पहुंचे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने कहा कि सोंगल की भूमि ने हर युग में अपना प्रभाव दिखाया है। उन्होंने कहा कि मुझे इस पवित्र परंपरा के प्रति सम्मान व्यक्त करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। उन्होंने कहा-'मैं महंत गणेश जी महाराज की स्मृतियों की नमन करते हए पूरे नाथ संप्रदाय की ओर से विनम्र श्रद्धांजिल अर्पित करता हूं। इस पावन धऱा पर  मैं आप सभी का हृदय से अभिवादन करता हूं।'

क्या बोले योगी आदित्य़नाथ?
 योगी आदित्यनाथ ने कहा "...कई वर्षों के बाद, संतों और भक्तों का इतना विशाल जमावड़ा यहां सोंगल में इकट्ठा हुआ है। इस पवित्र भूमि पर, एक ऐसी भूमि जिसने हर युग में अपना प्रभाव दिखाया है, आज मुझे इस पवित्र भंडारे और धर्म सभाके माध्यम से, आपके दर्शन  पाने का और आपके माध्यम से, उस पवित्र परंपरा के प्रति अपना सम्मान व्यक्त करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है।"


इसके साथ ही योगी आदित्यनाथ ने सनातन का विरोध करने वालों पर भी निशाना साधा और कहा किजब सनातन विरोधी सरकारें आएंगी तो वे तुष्टीकरण करेंगी। आजादी के बाद कश्मीर की समस्या हो या नक्सलवाद की समस्या, ये समस्याएं 'इन्हीं' लोगों ने दी हैं।

सोंगल का मठ क्यों है अहम?
दरअसल, कैथल के सोंगल गांव में बाबा मुकुटनाथ मठ एक पुराना ऐतिहासिक स्थल है। संतों के मुताबिक सिद्ध बाबा मुकुट नाथ महंत ने ही इस गद्दी की शुरुआत की थी। बाद में देश में धर्म नाथ पंथ की सभी गद्दी यहीं से निकली थी। यहां पर बाबा मुकुट नाथ और बाबा गोरखनाथ की पूजा होती है। बताया जाता है कि सोंगल गांव से ही गोरखनाथ मठ की गद्दी भी निकली थी। गोरखनाथ पीठ पीठाधीश्वर स्वयं योगी आदित्य़नाथ हैं। इसलिए उनका यहां से विशेष लगाव है। यहां महंत मुकुट नाथ की समाधि पर माथा टेकने के लिए बड़ी तादाद में लोग आते हैं। श्रद्धालुओं के अलावा नाथ महंथ के महंत भी यहां माथा टेकने के लिए आते हैं। 

कितना पुराना है सोंगल मठ?
इस डेरे का इतिहास 1600 से 1700 साल पुराना है। इस मठ के परिसर में 17 महंतों की समाधि बनी हुई है। माना जाता है कि यहां माथा टेकने से हर मनोकामना पूरी होती है। ऐसा बताया जाता है कि मुगलकाल में गोरखनाथ मठ की गद्दी पर मुगल अत्याचार करते थे। मुगलों ने इस मठ पर कब्जा भी कर लिया था। बाद में इस मठ पर हजारों की संख्या में नाथ पंथी पहुंचे और उसे मुगलों से मुक्त कराया था। प्राचीन समय में नाथ पंथ भक्ति के अलावा धर्म की रक्षा का भी काम करता था

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