तंत्र साधना में मानव बलि का मामला 

हाईकोर्ट ने मौत की सजा रद्द करके 2 लोगों को बरी किया

तंत्र साधना में मानव बलि का मामला 

निज संवाददाता : तंत्र साधना में मानव बलि के लिए मौत की सजा पाए दो आरोपियों को बरी कर दिया गया है। कलकत्ता हाईकोर्ट ने दोनों आरोपियों को बरी करने का आदेश दिया है। अदालती सूत्रों के अनुसार, लगभग सात साल पहले हुगली के खानाकुल में एक दंपति पर एक नाबालिग लड़की की बलि देने, उसके साथ बलात्कार और हत्या करने का आरोप लगा था। उस घटना में निचली अदालत ने मुख्य आरोपी सागरिका पंडित को मौत की सजा सुनाई थी। अदालत ने नाबालिग की दादी को भी आजीवन कारावास का आदेश दिया। कलकत्ता हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति देवांशु बसाक और न्यायमूर्ति प्रोसेनजीत विश्वास की खंडपीठ ने इन दोनों आरोपियों की सजा रद्द कर दी और उन्हें बरी करने का आदेश दिया।

बाद में, बच्ची का क्षत-विक्षत शव पड़ोसी के घर के सेप्टिक टैंक से बरामद हुआ। तांत्रिक मुरारी पंडित पर उसके साथ बलात्कार और हत्या का आरोप लगाया गया। उसकी पत्नी सागरिका को भी उसकी मदद करने के लिए जिम्मेदार ठहराया गया। पुलिस ने मुरारी, सागरिका और नाबालिग की दादी को गिरफ्तार किया। मुकदमे के दौरान मुख्य आरोपी मुरारी की मौत हो गई। अन्य दो में से, आरामबाग अदालत ने तांत्रिक की पत्नी को मौत की सजा सुनाई। मृतक की दादी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। सुनवाई के दौरान, सागरिका के वकील नीलाद्रिशेखर घोष ने तर्क दिया कि सबसे पहले, एक महिला होने के नाते उनके मुवक्किल पर बलात्कार का आरोप नहीं लगाया जा सकता है। इसके अलावा, तंत्र साधना के लिए मानव बलि महिलाओं की नहीं होती है। बलि के नियमों के अनुसार, केवल पवित्र चीजों की बलि दी जाती है। इसलिए, बलि से पहले बलात्कार का सिद्धांत पूरी तरह से गलत है। इसके अलावा, शव पड़ोसी के घर के सेप्टिक टैंक से बरामद किया गया था। पुलिस का दावा है कि घटना के काफी बाद में तलाशी के दौरान आरोपी के घर से बच्चों की पैंटी बरामद की गई थी। लेकिन पुलिस इस बात की पुष्टि नहीं कर सकी कि पैंटी नाबालिग की थी। इसके अलावा, उन्होंने जांच में कई अन्य लापरवाहियों का ज़िक्र अदालत के सामने किया। इसके बाद अदालत ने दोनों को बरी कर दिया। ऐसे में सवाल यह है कि असली हत्यारा कौन है। इस बारे में क़ानून के जानकारों का कहना है कि मृतक के पिता इस घटना की दोबारा जांच की माँग कर सकते हैं। क़ानून में वह रास्ता भी खुला है।

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