नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रपौत्र को एसआईआर का नोटिस

सुनवाई के लिए बुलाया गया

नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रपौत्र को एसआईआर का नोटिस


निज संवाददाता : पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची की एसआईआर की प्रक्रिया के तहत सुनवाई हो रही है। अब नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रपौत्र चंद्र कुमार बोस को नोटिस भेजा गया है और सुनवाई के लिए बुलाया गया है। सुनवाई को लेकर नोटिस मिलने के बाद बवाल मच गया है। चुनाव आयोग ने सफाई दी है कि आखिर चंद्र कुमार बोस को क्यों नोटिस दिया गया है?
एसआईआर  फेज के पहले चरण में बूथ लेवल ऑफिसर्स (बीएलओ)  ने घर-घर जाकर एन्यूमरेशन फॉर्म बांटे। वोटरों के फॉर्म भरने के बाद उन्होंने उन्हें इकट्ठा भी किया। उस फॉर्म के आधार पर एक ड्राफ्ट लिस्ट तैयार की गई। उसके बाद, आयोग जानकारी में गड़बड़ी समेत कई कारणों से वोटरों को नोटिस भेज रहा है। अब नेताजी के परपोते को नोटिस भेजा गया है।
जैसे ही यह मामला सामने आया, सवाल उठा कि क्या नेताजी के प्रपौत्र को भी नागरिकता का सबूत देना होगा?  नोटिस दिए जाने के बाद विवाद पैदा होने के बाद चुनाव आयोग ने सफाई दी है कि चुनाव आयोग ने कहा कि चंद्र बोस द्वारा जमा किए गए एन्यूमरेशन फॉर्म में यह साफ दिख रहा है कि उन्होंने खुद ‘लिंकेज’ से जुड़ा सेक्शन खाली छोड़ दिया था। इसीलिए, दूसरे वोटर्स की तरह उन्हें भी नियमों के अनुसार सुनवाई के लिए बुलाया गया है।
लिंकेज’ के तहत हर वोटर को एन्यूमरेशन फॉर्म में यह बताना होता है कि उसका नाम 2002 की वोटर लिस्ट में है या नहीं। अगर है, तो वह जानकारी फॉर्म में भरनी होती है और अगर नाम है, तो परिवार के सदस्यों, यानी माता-पिता या करीबी रिश्तेदारों की जानकारी देनी होती है, जिनके नाम उस लिस्ट में थे।
कमीशन का दावा है कि चंद्र बोस ने एन्यूमरेशन फॉर्म जमा करते समय वह सेक्शन पूरी तरह से खाली छोड़ दिया था। कमीशन ने सोशल मीडिया पर एक मैसेज के जरिए साफ किया कि चंद्र बोस को नोटिस भेजने के बारे में गुमराह किया जा रहा है।
इससे पहले भी पहले नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन, एक्टर और टीएमसी सांसद दीपक अधिकारी, क्रिकेटर मोहम्मद शमी समेत कई बड़ी हस्तियों को सुनवाई का नोटिस भेजने पर विवाद हो चुका है। पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस ने इस मुद्दे पर बार-बार आयोग और भाजपा पर निशाना साधा है। अब इस बार चंद्र बोस को सुनवाई का नोटिस भेजने पर हंगामा हुआ है।
चंद्र बोस साल 2016 में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए थे। उन्होंने भाजपा के टिकट पर दो बार चुनाव भी लड़ा था। एक बार 2016 में बंगाल के विधानसभा चुनाव में और दूसरी बार 2019 के लोकसभा इलेक्शन में, लेकिन, वह जीत नहीं पाए। धीरे-धीरे बीजेपी से उनकी दूरी बढ़ती गई। आखिर में, उन्होंने सितंबर 2023 में बीजेपी छोड़ दी।

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