‘पथश्री’ परियोजना के काम का निरीक्षण करेगी विशेष टीम
निज संवाददाता : नवान्न राज्य की सबसे बड़ी सड़क निर्माण परियोजनाओं में से एक 'पथश्री' को सीधी निगरानी में ला रहा है। ग्रामीण सड़क निर्माण में गुणवत्ता बनाए रखने के लिए, प्रत्येक ज़िले में अधिकारियों की विशेष टीमें भेजी जाएंगी। ये टीमें क्षेत्र में जाकर सड़क निर्माण की प्रगति, गुणवत्ता और दिशा-निर्देशों के अनुसार काम हो रहा है या नहीं, इसका निरीक्षण करेंगी। मुख्य सचिव मनोज पंत के नेतृत्व में शुक्रवार को नवान्न में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में यह निर्णय लिया गया।
सूत्रों के अनुसार, राज्य के मुख्य सचिव मनोज पंत ने बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि पथश्री परियोजना के काम में किसी भी तरह की देरी नहीं होनी चाहिए। इस परियोजना के तहत राज्य भर में लगभग 9 हज़ार किलोमीटर सड़कों का निर्माण किया जाएगा। इसमें से ग्रामीण क्षेत्रों में कई छोटी-बड़ी सड़कों का निर्माण और मरम्मत का काम शुरू भी हो चुका है। मुख्य सचिव ने कहा कि सड़कों की गुणवत्ता बनाए रखने में कोई लापरवाही नहीं बरती जाएगी। प्रत्येक ज़िला मजिस्ट्रेट द्वारा अपने-अपने क्षेत्र में सड़क निर्माण की गुणवत्ता को नियंत्रित करने के लिए कड़ी निगरानी की जाएगी। ग्रामीण संचार व्यवस्था को मजबूत करने की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की इस पहल में किसी तरह की लापरवाही या अनियमितता न हो, इसके लिए हर जिले में विशेष टीमें भेजी जाएंगी। ये टीमें सड़क निर्माण की प्रगति, गुणवत्ता, प्रयुक्त सामग्री की गुणवत्ता, भूमि संबंधी मुद्दों समेत सभी पहलुओं का निरीक्षण करेंगी।
मुख्य सचिव ने बैठक में यह भी कहा कि सड़क निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण या आवंटन में किसी भी तरह की अड़चन का तुरंत समाधान किया जाए ताकि विकास की गति बाधित न हो। साथ ही उन्होंने चल रही परियोजनाओं पर कड़ी नजर रखने को कहा ताकि एसआईआर प्रक्रिया के कारण कहीं भी काम न रुके।
पथश्री के साथ-साथ आज की बैठक में जलस्वप्न, 100 दिन का काम और बांग्लार बारी परियोजनाओं पर भी चर्चा हुई। नवान्न सूत्रों के अनुसार, सरकार दिसंबर तक बांग्लार बारी परियोजना के तहत करीब 16 लाख परिवारों तक पैसा पहुंचाना चाहती है। हालांकि, इससे पहले जिला प्रशासन को लाभार्थियों की सूची का दोबारा सत्यापन करने का निर्देश दिया गया है। मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया है कि सूची सत्यापन का काम 13 दिसंबर तक पूरा कर लिया जाए और जिनके नाम छूट गए हैं, उन्हें पुनर्विचार का अवसर दिया जाए। अगर सब कुछ ठीक रहा तो दिसंबर के आखिरी हफ्ते में मुख्यमंत्री खुद बांग्लार बाड़ी परियोजना की राशि लाभार्थियों को सौंप देंगे।
